About
ख्वाबों की स्याही से हक़ीक़त की धुनें तराशता हूँ,
शोर की इस दुनिया में बस सुकून-ए-मौसिक़ी तलाशता हूँ।
सन्नाटे गवाह हैं मेरी उन बेपरवाह काली रातों के,
जहाँ अल्फ़ाज़ कम पड़ गए, वो किस्से माइक पर बयाँ कर दिए।
ना शोहरत का गुरूर, ना किसी होड़ में शामिल होना,
मुझे तो बस अपनी हर ताल से दिलों में उतरना है।
साज़, सुर और मेरी तन्हाई—यही मेरा जहां है,
मेरी आवाज़ वहीं तक जाएगी, जहाँ तक तेरा आसमां है।